अच्छी संगति, सकारात्मक सोच और स्वस्थ जीवनशैली युवाओं को बेहतर भविष्य की ओर ले जाती है. उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वो खुद नशे से दूर रहने के साथ ही अपने साथियों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करें.नशे के खिलाफ लड़ाई सिर्फ सरकार और पुलिस के प्रयासों से नहीं जीती जा सकती. बल्कि अभिभावकों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और समाज के हर वर्ग को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी. विद्यालयों, महाविद्यालयों, कार्यस्थलों और खेल मैदानों से नशामुक्ति का संदेश हर घर और हर गांव तक पहुंचाना होगा.
उन्होंने युवाओं से कहा कि वे इस अभियान में केवल सहभागी बनकर न रहें, बल्कि इसका नेतृत्व करें और दूसरों के लिए प्रेरणा बनें.सीएम ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. नशे के अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई के साथ ही जनजागरूकता, नशामुक्ति, उपचार और पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि नशे की लत से प्रभावित व्यक्तियों को सही मार्गदर्शन, परामर्श, उपचार और परिवार का भावनात्मक सहयोग मिलना भी आवश्यक है.
नशामुक्त उत्तराखंड के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रभावी कार्रवाई के साथ ही सामाजिक जागरूकता और पुनर्वास के प्रयासों में बेहतर समन्वय जरूरी है.उत्तराखंड देवभूमि होने के साथ ही वीरों, तपस्वियों और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं की भूमि है. हमारी युवा पीढ़ी को इस गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा, कौशल विकास, खेल, स्टार्टअप, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल करनी हैं. सरकार का प्रयास है कि युवाओं की ऊर्जा का उपयोग प्रदेश और देश के विकास में हो तथा उन्हें अपनी प्रतिभा निखारने के अधिक से अधिक अवसर मिलें.
नशामुक्त उत्तराखंड का संकल्प केवल किसी एक आयोजन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे अपने आचार, विचार और व्यवहार का हिस्सा बनाना होगा. उन्होंने सभी से नशे को ना, जिंदगी को हां का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि सामूहिक प्रयासों और जनभागीदारी से ही एक ऐसे स्वस्थ, सशक्त और नशामुक्त उत्तराखंड का निर्माण किया जा सकता है, जहां प्रत्येक युवा अपनी प्रतिभा और परिश्रम से आगे बढ़े और हर परिवार का भविष्य सुरक्षित और खुशहाल हो.