घर में हुआ धमाका, सड़कों पर बिछी थीं लाशें, ब्लास्ट से दहला सिवान – Uttarakhand Surya

घर में हुआ धमाका, सड़कों पर बिछी थीं लाशें, ब्लास्ट से दहला सिवान

सिवान में पटाखा फैक्ट्री में हुए ब्लास्ट ने कई सवाल खड़े किए हैं. आखिर हादसों से सीख क्यों नहीं ली जा रही? रिपोर्ट-इमरोज अहमद.

सिवान : बिहार के सिवान में शुक्रवार शाम तकरीबन 5 बजे उस समय लोग सहम उठे जब धमाकों की गूंज आलमापुर गांव में सुनाई पड़ने लगी. जामो थाना क्षेत्र में अमरुद्दीन मियां का घर था. आरोप है कि वहां पर अवैध रूप से पटाखा बनाने का काम चल रहा था.

थानाध्यक्ष और चौकीदार निलंबित

हादसे का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि काफी देर तक रुक-रुककर ब्लास्ट होता रहा. लोगों के शरीर के चिथड़े उड़ गए थे. घर में ब्लास्ट हुआ, और शव सड़क पर पड़े थे. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस हादसे में 8 लोगों की मौत हुई है. थाना अध्यक्ष धीरज कुमार और चौकीदार चंद्रिका मांझी को निलंबित कर दिया गया है.

एक ही परिवार के 7 सदस्य

एसपी भरत सोनी ने कहा कि शाम साढ़े बजे के आसपास सूचना मिली. अभी तक 5 लोगों की मौत की पुष्टि हो पाई है. स्थानीय मुखिया का कहना है कि ये सभी एक ही परिवार के 7 लोग हैं. अन्य हताहतों की संख्या को लेकर मेडिकल टीम पुष्टि करेगी. एफएसएल टीम ने भी सैंपल इकट्ठा किया है. घटनास्थल पर फायर ब्रिगेड, मेडिकल टीम और पुलिस प्रशासन की टीम मौजूद है.

“एक प्राथमिकी दर्ज की जाएगी और जांच की जाएगी कि घटना का कारण क्या है? पटाखे कहां से लाए जाते थे? उनके पास लाइसेंस था या नहीं? ग्रामीणों से जानकारी मिली है कि वे पिछले 20 वर्षों से पटाखा व्यापार कर रहे थे. सभी एंगल से घटना की जांच की जा रही है.”– भरत सोनी, एसपी, सिवान

काफी देर तक होता रहा ब्लास्ट

घटना की सूचना मिलते ही एसपी और डीएम मौके पर पहुंचे. स्थानीय पुलिस और दमकल की गाड़ियां भी घटनास्थल पर पहुंची. हादसे का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जब एसपी भरत सोनी पत्रकारों से बात कर रहे थे उसवक्त भी अंदर से ब्लास्ट की आवाज साफ सुनाई पड़ रही थी. धमाके की वजह से राहत और बचाव कार्य में भी बाधा पहुंची.

फिलहाल शवों को पोस्टमर्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया है. वहीं घायलों का इलाज चल रहा है. स्थानीय लोग इस हादसे से काफी सहमे नजर आ रहे हैं. उनका कहना है कि काफी सालों से यहां पर अवैध तरीके से पटाखा बनाने का काम चल रहा था. इसके बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई.

पहले भी हो चुकी हैं मौतें

ऐसा नहीं है कि बिहार में पहली बार पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट से लोगों की जानें गई हैं. इससे पहले भी कई लोग काल के गाल में समा चुके हैं. 4 मार्च 2022 को भागलपुर के काजबलीचक इलाके में अवैध रूप से चल रहे पटाखा और बारूद के कारोबार के दौरान हुए भीषण विस्फोट में 14 लोगों की मौत हो गई थी और 10 से अधिक लोग घायल हो गए थे. चार मंजिला इमारत इसमें जमींदोज हो गया था.

24 जुलाई 2022 को सारण में एक व्यवसायी के घर में चल रहे अवैध पटाखा फैक्ट्री में जोरदार धमाका हुआ था. जिसमें 5 लोगों की मौत हो गई थी और 8 लोग घायल हो गए थे. 23 मार्च 2018 को नालंदा के सोहसराय इलाके में अवैध रूप से संचालित पटाखा फैक्ट्री में भयंकर विस्फोट हुआ था. जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई थी और 17 से अधिक लोग घायल हो गए थे.

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