दो महीने पहले फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब गई थीं दोनों बहनें: अतुल के अनुसार, करीब दो माह पहले ही दोनों बहनें उत्तराखंड के फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब की ट्रेकिंग करके लौटी थीं. इससे पहले करीब एक साल पूर्व अतुल ने अपनी दोनों बहनों और दो दोस्तों के साथ उत्तरकाशी जिले के मोरी क्षेत्र स्थित केदारकांठा की ट्रेकिंग भी की थी. इसके अलावा दोनों बहनें नेपाल के विभिन्न पर्वतीय क्षेत्रों में भी ट्रेकिंग कर चुकी थीं.
उत्तरकाशी से लखनऊ तक चिंता का माहौल: अतुल ने बताया कि दोनों बहनें ट्रेकिंग के दौरान जरूरी उपकरणों और सुविधाओं का पूरा ध्यान रखती थीं. उनके पास ट्रेकिंग से संबंधित आवश्यक सामान भी रहता था. परिवार को उम्मीद है कि दोनों बहनें सुरक्षित होंगी और जल्द ही उन्हें सकुशल वापस लाया जाएगा. उत्तरकाशी पहुंचने के बाद से ही परिजन राहत एवं बचाव अभियान से जुड़ी जानकारी जुटा रहे हैं. दोनों बहनों के लापता होने से लखनऊ स्थित उनके परिवार और परिचितों में चिंता का माहौल है.
27 अक्टूबर को ट्रेकिंग पर गया था 13 सदस्यीय दल: बीती 27 अक्टूबर को उत्तरकाशी के गंगोत्री से 7 ट्रेकर्स और 6 सपोर्टिंग स्टाफ समेत कुल 13 सदस्यीय दल केदारताल ट्रेक के लिए रवाना हुआ था. इसमें 1 कुक अगले ही दिन गंगोत्री लौट आया था. दल के अन्य सदस्यों को 29 अक्टूबर तक लौटना था, लेकिन मौसम खराब और फंसने के कारण दल समय तक नहीं पहुंच पाया था.
मंगलवार को 2 शव मिले थे: इसके बाद से रेस्क्यू अभियान जारी था. लापता लोगों में पश्चिम बंगाल के पांच ट्रेकर्स तपस बाउरी (30), रतन घोष (23), मनोज खोवास (39), रिंटू मंडल (40), उदय घोष (30), उत्तर प्रदेश की दो महिला ट्रेकर्स वर्तिका वर्मा (28), दीपिका वर्मा (29) और उत्तरकाशी का स्थानीय गाइड 25 वर्षीय सिद्धार्थ राणा शामिल है. मंगलवार को रेस्क्यू टीम को दो शव मिले थे. जो शव मिले हैं, वो कौन हैं, इसकी पुलिस ने अभी तक पुष्टि नहीं की है.