घटिया सरसों तेल बेचने वाली ऑयल कंपनी पर लगा ₹2.30 लाख का जुर्माना, विक्रेता भी फंसे – Uttarakhand Surya

घटिया सरसों तेल बेचने वाली ऑयल कंपनी पर लगा ₹2.30 लाख का जुर्माना, विक्रेता भी फंसे

सीमांत जिला पिथौरागढ़ में खाद्य संरक्षा विभाग की ओर से दायर वाद की सुनवाई करते हुए न्याय निर्णायक अधिकारी एडीएम पिथौरागढ़ योगेंद्र सिंह की अदालत ने तेल निर्माता कंपनी सहित तीन खाद्य विक्रेताओं पर 2.30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन के असिस्टेंट कमिश्नर आरके शर्मा ने बताया कि साल 2023 में वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने पिथौरागढ़ नगर के सिमलगैर बाजार स्थित एक दुकान से कच्ची घानी सरसों के तेल का नमूना लिया था. रुद्रपुर स्थित प्रयोगशाला से जब रिपोर्ट मिली तो उसमें तेल सब स्टैंडर्ड (मानक से नीचे) पाया गया. न्याय निर्णायक अधिकारी एडीएम पिथौरागढ़ योगेंद्र सिंह

इसके बाद विभाग की ओर से आगरा की तेल निर्माता कंपनी, कालाढुंगी चौराहा हल्द्वानी के थोक विक्रेता और पिथौरागढ़ के रिटेलर के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत न्यायालय में मुकदमा दर्ज किया गया. मुकदमे की सुनवाई करते हुए पिथौरागढ़ के अपर जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह ने पिथौरागढ़ और हल्द्वानी के व्यापारियों पर 15-15 हजार रुपये जबकि तेल निर्माता कंपनी पर दो लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है. साथ ही न्यायालय द्वारा कंपनी को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम का पालन करने को कहा गया है.

पिथौरागढ़ के विशेष सत्र न्यायाधीश एनडीपीएस शंकर राज ने तीन चरस तस्करों को कठोर कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है. मामले के अनुसार वर्ष 2020 में कोतवाली पिथौरागढ़ पुलिस द्वारा चौकी घाट पर चेकिंग के दौरान एक वाहन से महेश भट्ट, मनोज पांडे और कैलाश भट्ट को 239.1 ग्राम अवैध चरस के साथ गिरफ्तार किया था.

कोतवाली पिथौरागढ़ में तीनों के विरुद्ध एनडीपीएस अधिनियम के अंतर्गत अभियोग दर्ज किया गया था. एसआई मेघा शर्मा ने विवेचना करने के बाद 17 अगस्त 2021 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया. मामले की पैरवी ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी राकेश चंद्र द्वारा की गई.

सुनवाई के बाद मंगलवार को विशेष सत्र न्यायाधीश पिथौरागढ़ शंकर राज ने तीनों आरोपियों को दोष सिद्ध करार दिया. न्यायालय ने अभियुक्त महेश भट्ट और मनोज पांडेय को 03 वर्ष का कठोर कारावास व 25 हजार का अर्थदण्ड जबकि अभियुक्त कैलाश भट्ट को 1 वर्ष का कठोर कारावास व 10 हजार के अर्थदण्ड की सजा सुनाई. अर्थदण्ड अदा न करने पर अभियुक्तों को 02 वर्ष व 02 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.




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