काशीपुर रंगोत्सव होली मिलन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री धामी – Uttarakhand Surya

काशीपुर रंगोत्सव होली मिलन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री धामी

काशीपुर नगर निगम परिसर में आयोजित रंगोत्सव होली मिलन समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सहभागिता कर उपस्थित जनसमूह को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने पारंपरिक कुमाऊँनी होली, शास्त्रीय होली एवं भजन गायन के साथ जनसमूह के साथ होली गायन में प्रतिभाग किया।

मुख्यमंत्री ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे आज होली महोत्सव के माध्यम से आप सभी के बीच आकर इस पावन पर्व को मनाने का सुअवसर प्राप्त हो रहा है। उन्होंने इस महोत्सव के सफल आयोजन के लिए काशीपुर नगर निगम की पूरी टीम को बधाई एवं होली की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक कार्यक्रम का आयोजन नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजकर उन्हें नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सराहनीय कार्य है।

उन्होंने कहा कि मुझे अत्यंत प्रसन्नता होती है जब ऐसे आयोजनों में हमारी माताएँ, बहनें, युवा साथी और सभी नागरिक बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं और मिलजुलकर इस पर्व को उत्साह और आनंद के साथ मनाते हैं। क्योंकि होली मात्र रंग लगाकर धूम मचाने का ही त्योहार नहीं है, बल्कि यह परस्पर प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव बढ़ाने का भी अवसर है। उन्होंने कहा कि यह रंगों का त्योहार हमें याद दिलाता है कि जीवन की सच्ची खुशियाँ अपनापन बढ़ाने में ही हैं।

मुख्यमंत्री ने अपने बाल्यकाल की होली की यादें साझा करते हुए कहा कि उन्हें आज भी याद है कि वे बचपन में होली का कितनी उत्सुकता से इंतजार किया करते थे। रंगों का उत्साह तो होता ही था, लेकिन इस समय घर में बनने वाले पकवानों से जो खुशबू आती थी, उसकी बात ही कुछ निराली होती थी।

उन्होंने कहा कि गाँव की वह सामूहिक होली, जहाँ न ऊँच-नीच का भेद होता था और न ही छोटे-बड़े का अंतर, सब एक साथ एक रंग में रंग जाते थे। जब ढोल-दमाऊँ की गूंज उठती थी और हुड़के एवं ढोलक की थाप पर होली के गीत शुरू होते थे, तो पूरा वातावरण भक्ति और उमंग के अद्भुत मिश्रण से भर जाता था।

उन्होंने कहा कि आज इस महोत्सव में वही अटूट एकता, वही प्रेम और वही आपसी भाईचारा देखकर मेरा मन प्रफुल्लित है। उन्होंने कहा कि जब भी मैं अपनी माताओं-बहनों और युवा साथियों को अपनी लोक-संस्कृति का गौरव बढ़ाते हुए देखता हूँ, तो मेरा यह विश्वास दृढ़ हो जाता है कि हमारी सांस्कृतिक जड़ें आज भी बहुत गहरी हैं और बदलते समय के साथ ये समाप्त नहीं हो रही हैं, बल्कि नई पीढ़ी तक भी पहुँच रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पर्व और उत्सव केवल परंपराएँ नहीं हैं, ये हमारी पहचान हैं। यही हमें हमारी मिट्टी और हमारी संस्कृति से जोड़कर रखते हैं। इसी भावना से हमारी सरकार देवभूमि की इस समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और उसे नई पीढ़ी तक सुरक्षित पहुँचाने के लिए अपने “विकल्प रहित संकल्प” के साथ कार्य कर रही है।




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