हरिद्वार जिले के रुड़की क्षेत्र में दवाओं के कारोबार में नियमों की अनदेखी और प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री पर औषधि विभाग ने अब सख्त रुख अपना लिया है. अपर आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन उत्तराखंड ताजबर जग्गी के निर्देशन में विभागीय टीम ने रुड़की और झबरेड़ा क्षेत्र में थोक एवं फुटकर मेडिकल स्टोरों पर औचक निरीक्षण कर दस्तावेजों से लेकर दवाओं के भंडारण तक की गहन पड़ताल की. कार्रवाई के दौरान गंभीर अनियमितताएं मिलने पर आठ मेडिकल स्टोरों का क्रय-विक्रय तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया, जबकि उनके लाइसेंस निलंबित करने की संस्तुति भी की गई है.
दरअसल, उप औषधि नियंत्रक हेमन्त नेगी द्वारा गठित संयुक्त टीम में औषधि निरीक्षक हरीश सिंह, औषधि निरीक्षक हार्दिक भट्ट और औषधि निरीक्षक अमित कुमार आजाद शामिल रहे. टीम के मेडिकल स्टोरों पर पहुंचते ही संचालकों में खलबली मच गई. अधिकारियों ने एक-एक प्रतिष्ठान में दवाओं के खरीद-बिक्री संबंधी अभिलेख, बिल बुक, स्टॉक रजिस्टर, एक्सपायरी दवाओं के रखरखाव, फार्मासिस्ट की मौजूदगी और कोल्ड चेन वाली दवाओं के भंडारण की बारीकी से जांच की. इस दौरान नशे के कारोबार पर विशेष नजर रखी गई, निरीक्षण के दौरान नारकोटिक और साइकोट्रॉपिक दवाओं की बिक्री को लेकर विशेष जांच की गई.
टीम ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि ऐसी दवाओं का इस्तेमाल नशे के लिए न हो, मेडिकल स्टोर संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि बिना वैध चिकित्सकीय प्रिस्क्रिप्शन के शेड्यूल्ड और नारकोटिक दवाओं की बिक्री कतई न की जाए. अधिकारियों ने एनडीपीएस एक्ट, 1985 और औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 के तहत रखे जाने वाले रजिस्टर, बिल और स्टॉक का भी परीक्षण किया. साथ ही औषधि नियमावली, 1945 के प्रावधानों के अनुरूप ही दवा कारोबार संचालित करने की हिदायत दी गई.