105 अमेरिकी सांसदों ने इलिनोइस हिंदू मंदिर हमले की FBI जांच की मांग की – Uttarakhand Surya

105 अमेरिकी सांसदों ने इलिनोइस हिंदू मंदिर हमले की FBI जांच की मांग की

कांग्रेस के लेटर के मुताबिक इन्वेस्टिगेटर्स ने एक राइफल सैकड़ों राउंड गोलियां, बॉडी आर्मर और अन्य चीजें बरामद की. संदिग्ध पर आतंकी धमकी देने और गैर-कानूनी तरीके से हथियार रखने का आरोप है. कोर्ट में ये आरोप साबित नहीं हुए हैं. सांसदों ने लिखा, ‘कथित तौर पर टारगेटेड नस्लीय नफरत, धार्मिक माहौल और बड़े पैमाने पर हिंसा की तैयारी के मेल के लिए एक बड़े फेडरल जवाब की जरूरत है.’ उन्होंने स्थानीय जांचकर्ताओं को एफबीआई की कथित मदद को माना. लेटर में भारतीयों, हिंदुओं, सिखों और दूसरे साउथ एशियन कम्युनिटीज के प्रति बढ़ती ऑनलाइन दुश्मनी के बारे में भी चिंता जताई गई.

A statue and fountain are displayed outside of Sri Venkateswara Swami (Balaji) Temple in Aurora, Ill., Thursday, Oct. 15, 2026. (AP Photo/Laura Bargfeld)

सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑर्गनाइज्ड हेट की सितंबर 2026 की एक स्टडी का हवाला देते हुए सांसदों ने कहा कि जनवरी 2025 और जून 2026 के बीच एक्स पर 542,000 से ज़्यादा एंटी-साउथ एशियन हेटफुल पोस्ट आए. स्टडी में पाया गया कि जनवरी 2024 और जून 2026 के बीच ऐसे पोस्ट का मंथली वॉल्यूम लगभग 240 परसेंट बढ़ गया.

एक अलग कार्नेगी एंडोमेंट सर्वे में पाया गया कि 48 फीसदी भारतीय -अमेरिकन जवाब देने वालों को 2025 की शुरुआत से अक्सर अपने समुदाय को टारगेट करने वाले नस्लवादी ऑनलाइन पोस्ट मिले थे. सांसदों ने फेडरल एजेंसियों के सोशल मीडिया मैसेजिंग की भी आलोचना की. इनके बारे में उन्होंने कहा कि इससे नस्लीय और धार्मिक रूढ़ियाँ को मजबूत करने का खतरा है.

उन्होंने सितंबर में डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी के एक पोस्ट का जिक्र किया जिसमें एक सिख आदमी को यह मैसेज देते हुए दिखाया गया था, ‘हमारी सड़कों से हट जाओ, तुम्हें गाड़ी चलाना नहीं आता मिस्टर सिंह.’ आलोचना के बाद पोस्ट को बाद में हटा दिया गया, जबकि डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी का कहना था कि यह एक जानलेवा ट्रैफिक एक्सीडेंट के आरोपी एक खास व्यक्ति के बारे में था.

कानून बनाने वालों ने यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के एक फुटबॉल गेम में साउथ एशियन दर्शकों के बारे में शिकायतों के बाद डिपार्टमेंट ऑफ़ एजुकेशन के एक पोस्ट का भी जिक्र किया. लेटर में कहा गया, ‘हमारा मानना ​​है कि इस तरह के मैसेज से नस्लीय और धार्मिक रूढ़िवादी को सरकारी मान्यता मिलने का खतरा है.’

कानून बनाने वालों ने एफबीआई से यह बताने के लिए कहा कि क्या इन्वेस्टिगेटर कथित ऑरोरा प्लॉट से जुड़े ऑनलाइन कम्युनिकेशन की जांच कर रहे थे, जिसमें दूसरे लोगों से मिली संभावित मदद भी शामिल है.

उन्होंने एजेंसी की भरोसेमंद खतरों की पहचान करने, लोकल अधिकारियों के साथ इंटेलिजेंस शेयर करने और टारगेट किए जा सकने वाले पूजा की जगहों की सुरक्षा करने की क्षमता के बारे में भी जानकारी मांगी. पत्र में 29 अक्टूबर तक लिखित जवाब मांगा गया, जिसमें यह डिटेल भी शामिल हो कि क्या जांच में नस्लीय और धार्मिक भेदभाव दोनों की जांच की जा रही है.

सांसदों ने लिखा, ‘किसी को भी अपने वंश, रूप-रंग या आस्था की वजह से टारगेट किए जाने का डर नहीं होना चाहिए और किसी भी जमावड़े को यह नहीं सोचना चाहिए कि पूजा के लिए इकट्ठा होने से उसके सदस्य सामूहिक हिंसा का निशाना बन जाएंगे.’

इंडियन-अमेरिकन अमेरिका में एशियाई मूल के सबसे बड़े समुदायों में से हैं, जिनकी आबादी इलिनोइस और दूसरे राज्यों में काफी है. हिंदू मंदिर, सिख गुरुद्वारे और दूसरे धार्मिक संस्थान कम्युनिटी और कल्चरल लाइफ के जरूरी सेंटर के तौर पर काम करते हैं.

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