उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सालों से राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में उपनल (उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड) के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों को नियमित न करने व उनकी जगह पर सरकार के द्वारा नई भर्ती किये जाने के खिलाफ दायर विशेष अपील पर सुनवाई की.
मामले को कोर्ट की खंडपीठ ने साल 2018 में पारित कुंदन सिंह बनाम राज्य सरकार का आदेश की अवहेलना पाते हुए राज्य के स्वास्थ्य सचिव से पूछा कि आदेश का आखिर क्यों पालन नहीं हुआ? दो सप्ताह के भीतर वे अपना शपथ-पत्र कोर्ट के सामने पेश करें.
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ती सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई. अगली सुनवाई कोर्ट ने दो सप्ताह बाद की तिथि नियत की है. सुनवाई के दौरान पूर्व महाधिवक्ता व उच्च न्यायलय के वरिष्ठ अधिवक्ता विजय बहादुर सिंह नेगी और अधिवक्ता ललित सामंत ने याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखा.
याचिकाकर्ताओं का पक्ष करते हुए दोनों वकीलों ने कहा कि वर्ष 2018 में उच्च न्यायलय ने उपनल कर्मचारियों के हक में फैसला देते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि इन कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से वर्षानुसार नियमित किया जाय, लेकिन वर्तमान समय में सरकार ने न तो इनको नियमित कर रही है न ही कोर्ट के आदेश का अनुपालन कर रही है. वर्तमान में उल्टा राज्य सरकार इनके पदों पर नियमित भर्ती कर रही है, जिसकी वजह से वर्षो से कार्यरत कर्मचारी बेरोगार होने की लाइन में खड़े होने को है.
याचिककर्ताओं के वकीलों की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि उनको वर्तमान में दी जाने वाली कई सेवाओं से सरकार ने वंचित भी कर दिया गया है. सरकार कोर्ट के आदेशों का अनुपालन नहीं करना चाह रही है, जबकि कोर्ट का पूर्व का आदेश को सर्वोच्च न्यायलय ने वैध करार दिया गया. उसके बाद भी उसका अनुपालन नहीं हो रहा है, जो कि मेनका गांधी बनाम केंद्र सरकार के आदेश का भी उल्लंघन है. राज्य सरकार संविधान में उनको दिए गए समनाता के अधिकारों का पालन नहीं करना चाह रही है, न ही कोर्ट के आदेशों का पालन कर रही है. याचिकाकर्ता दीपक कुमार, मंजूल मेहता व अन्य ने विशेष अपील दायर कर कहा है कि कोर्ट सरकार को निर्देश दे कि कोर्ट के आदेशों का अनुपालन शीघ्र सरकार करें.