यात्रियों में दिखा खासा उत्साह: उल्लेखनीय है कि गर्मियों के मौसम में तापमान बढ़ने और बर्फ के पिघलने की वजह से ओम की पारंपरिक आकृति धीरे-धीरे ओझल हो जाती है. लेकिन इस बार नई बर्फ जमने की प्रक्रिया के साथ ही न केवल मुख्य ओम (ॐ) आकृति निखर कर आई, बल्कि उसके साथ एक नई दूसरी ओम जैसी आकृति भी सतह पर उभर आई. इस नजारे ने यात्रियों के उत्साह को कई गुना बढ़ा दिया है.
नाभीढांग के पास स्थित है यह पावन स्थल: भौगोलिक दृष्टिकोण से देखें तो पवित्र ओम पर्वत उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ जिले की व्यास घाटी में नाभीढांग के समीप स्थित है. यह क्षेत्र प्रसिद्ध कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग के प्रमुख और सबसे आकर्षण केंद्रों में गिना जाता है. पर्वत की ढलान पर जमी बर्फ प्राकृतिक रूप से पवित्र ओम अक्षर का आकार ले लेती है, इसी अद्वितीय विशेषता के कारण इस पर्वत का नाम ‘ओम पर्वत’ पड़ा.
देश-विदेश से बड़ी तादाद में पहुंचे हैं यात्री: धार्मिक और आध्यात्मिक महत्वहिंदू धर्म और संस्कृति में ओम को ब्रह्मांड की प्रथम ध्वनि और अत्यंत पवित्र प्रतीक माना गया है. इसी धार्मिक मान्यता के कारण देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु ओम पर्वत के दर्शन को केवल एक पर्यटक स्थल नहीं, बल्कि यहां की आध्यात्मिक और दिव्य अनुभव को महसूस करने आते हैं. आदि कैलाश यात्रा पर जाने वाले हर यात्री के लिए ओम पर्वत के दर्शन करना यात्रा का सबसे मुख्य और अविस्मरणीय हिस्सा होता है.
पर्यटन का प्रमुख केंद्र और मौसम पर निर्भरता: धार्मिक आस्था के साथ-साथ ओम पर्वत अपनी विशाल हिमालयी चोटियों, बर्फ की सफेद चादर ढकी ढलानों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. मौसम साफ रहने पर दूर-दूर से इसकी चोटियां बेहद आकर्षक और स्पष्ट नजर आती हैं.
आकृतियों में आ सकता है बदलाव: हालांकि, हिमालयी क्षेत्रों में मौसम बहुत तेजी से बदलता है. विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि बर्फबारी, तापमान और हवा की परिस्थितियों के अनुसार पर्वत पर बनने वाली बर्फ की इन आकृतियों में बदलाव आ सकता है. इसलिए दो ओम का यह दुर्लभ नजारा कितने समय तक इसी रूप में बना रहेगा, यह पूरी तरह से आने वाले दिनों के मौसम पर निर्भर करेगा.