शहर में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत लगाए गए कैमरों का एक्सेस पुलिस विभाग को भी दिया गया है. इसका मकसद यातायात व्यवस्था की निगरानी करने के साथ नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना है. कैमरों की मदद से पुलिस को हर जगह मौके पर मौजूद रहने की जरूरत नहीं पड़ती और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ डिजिटल माध्यम से कार्रवाई की जा सकती है. लेकिन इस पूरी व्यवस्था में सबसे बड़ी परेशानी तब सामने आ रही है, जब वाहन स्वामी चालान का भुगतान करने पहुंचते हैं.
महीने पुराना चालान अब मिला है. करीब 2 साल पहले एक चालान काटा था, तब भी ऐसा ही हुआ था और उस दौरान भी जब चालान का भुगतान करने पहुंचा तो सर्वर नहीं चल रहा था और जब फिर से चालान का भुगतान करने गए तो सर्वर काम नहीं कर रहा था.
-शिव कुमार, वाहन स्वामी-
ऑनलाइन चालान कटने के बाद उसका भुगतान करने के लिए वाहन स्वामियों को ट्रैफिक पुलिस कार्यालय पहुंचना पड़ रहा है. यहां पहुंचने पर उन्हें भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. लोगों के मुताबिक चालान जमा कराने के लिए कार्यालय पहुंचने पर सर्वर डाउन होने की जानकारी दी जाती है. इसके बाद उन्हें बिना भुगतान किए वापस लौटना पड़ता है.एक बार कार्यालय पहुंचने से समस्या हल नहीं होती तो लोगों को दोबारा और कई बार तीसरी बार भी चक्कर लगाने पड़ रहे हैं.
चालान भुगतान के लिए कई चक्कर लगा दिए हैं और हमेशा सर्वर डाउन होने की बात कही जाती है. पुलिस विभाग को इस पर काम करना चाहिए, ताकि लोगों को परेशानी ना हो.
-शांति प्रसाद, वाहन स्वामी-
इससे आने-जाने में खर्च होने वाला पैसा और काम छोड़कर कार्यालय पहुंचने में लगने वाला समय अलग से बर्बाद हो रहा है.हैरानी की बात यह है कि भुगतान में परेशानी होने पर काउंटर पर मौजूद कर्मचारी भी लोगों को कोई स्पष्ट विकल्प नहीं बता पा रहे हैं. ऐसे में वाहन स्वामियों के सामने असमंजस की स्थिति बनी हुई है. चालान जमा करने की मंशा से कार्यालय पहुंचने वाले लोगों को भी तकनीकी खामी के कारण परेशानी झेलनी पड़ रही है.
इस पूरी व्यवस्था पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं, क्योंकि चालान काटने के लिए डिजिटल सिस्टम काम कर रहा है. कैमरों के जरिए नियमों का उल्लंघन पकड़कर कार्रवाई की जा रही है, लेकिन भुगतान के समय व्यवस्था बाधित हो रही है. यदि चालान काटने के लिए तकनीक उपलब्ध है, तो भुगतान के लिए भी ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे लोगों को बार-बार कार्यालय न पहुंचना पड़े.
अब तक मुझे इस बात की जानकारी नहीं थी. अब इस मामले में पुलिस विभाग से सर्वर के ठीक से काम नहीं करने के पीछे की वजह जानी जाएगी. लोगों की समस्या को दूर किया जाएगा.
-आशीष चौहान, जिलाधिकारी देहरादून
हालांकि चालान भरने का ऑनलाइन तरीका भी मौजूद है लेकिन वहां से भी भुगतान नहीं हो पा रहा है..हालांकि संभवतः कुछ लोग भुगतान कर पा रहे हो लेकिन ट्रैफिक कार्यालय पहुंचने वाले बड़ी संख्या में है जो इन समस्यों को बया कर रहे हैं और उन्हें बेवजह परेशान होना पड़ रहा है. लोगों की माने तो उन्हें ना तो समय पर चालान की जानकारी मिल पा रही है और जब वह चालान भरने आ रहे हैं तो भुगतान भी नहीं हो रहा है.
जिसके कारण उन्हें बार-बार ट्रैफिक कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं. इसका असर केवल वाहन स्वामियों की सुविधा तक सीमित नहीं है. चालान का भुगतान समय पर नहीं हो पाने से सरकारी राजस्व की वसूली की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है. वहीं डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य लोगों को सुविधा देना है, लेकिन सर्वर संबंधी समस्याएं उसी व्यवस्था को परेशानी का कारण बना रही हैं.