केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की संस्था इंडियन फार्माकोपिया कमीशन यानी आईपीसी ने दवा निर्माण के नए मानक तय किए हैं. देशभर में आगामी एक जुलाई से यह मानक लागू हो जाएंगे. देशभर में फार्मा उद्योग से जुड़े इंडस्ट्रलिस्ट को इसके बारे में जानकारी दी जा रही है. उत्तराखंड में हरिद्वार से इसकी शुरुआत हुई.
बुधवार को आईपीसी और एसोसिएशन ऑफ देवभूमि फार्मा इंडस्ट्रीज, उत्तराखंड के संयुक्त तत्वावधान में हरिद्वार के सिडकुल स्थित एकम्स टाउनहॉल में एक दिवसीय वैज्ञानिक सम्मेलन एवं संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में उत्तराखंड के विभिन्न फार्मा उद्योगों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया. इस कार्यक्रम में साइंटिफिक कॉन्क्लेव और इंटरएक्टिव सेशन का मुख्य उद्देश्य देश के दवा निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देना रहा. साथ ही विश्व के नए मानकों के अनुरूप ही दवा तैयार करना तथा दवा उद्योग को नए वैज्ञानिक एवं तकनीकी मानकों की जानकारी देना रहा.
सम्मेलन में दवाओं के उत्पादन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई. विशेषज्ञों ने बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप दवाओं में संभावित अशुद्धियों को न्यूनतम स्तर पर लाना आवश्यक बताया, ताकि मरीजों तक सुरक्षित और प्रभावी दवाएं पहुंच सकें. इस दौरान आईपीसी के निदेशक और वैज्ञानिक डॉ. वी. कलेसेल्वन, उत्तराखंड के ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह और उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से पहुंचे ड्रग विभाग के अधिकारियों को सम्मानित भी किया गया.
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आईपीसी के निदेशक और वैज्ञानिक डॉ. वी. कलेसेल्वन ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा द्वारा बीती 02 जनवरी को लॉन्च किए गए आईपी 2026 के नए मानक आगामी 01 जुलाई से देशभर में लागू कर दिए जाएंगे. इसलिए देवभूमि ड्रग एसोसिएशन और ड्रग कंट्रोलर विभाग के साथ मिलकर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है.
ताजबर ने बताया कि भारत के कुल दवा निर्यात में उत्तराखंड की 20 प्रतिशत भागीदारी है. इसलिए हरिद्वार में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है. कार्यक्रम में फार्मा उद्योग से जुड़े कई प्रतिनिधि शामिल हुए. निश्चित रूप से आने वाले समय में लोगों को और भी ज्यादा उच्च मानकों वाली दवाएं मिल सकेंगी.